Wednesday, August 8, 2012


क्या आज़ादी ये है अपनी 
क्या यही अंजाम है?
सड़ रहा अनाज फिर भी 
भूख क्यूँ थाली में है?

पहनते टोपी है गांधी 
क्या उनके दिल में है?
न फिरंगी न है पाकि 
दुश्मन हमारे घर में है

चीर दे नाख़ून से पर्बत 
रुख हवा का मोड दे 
छीन ले तू हक़ जो तेरा 
छीना इस खादी ने है

कौन कहता है जुदा है, 
माँ हमारी एक है 
हम में है राम है रहीम, 
मजहब हिंदुस्तान है

सरफरोशी की तमन्ना 
अब हमारे दिल में है....
- महेश जाधव

No comments: