भ्रष्टाचार...हाँ भ्रष्टाचार
वही भ्रष्टाचार...
जो नेता के दिल से निकलता है
सरकारी दफ्तर पलता है
रिश्वतखोरी का रूप लेकर
टेबल के निचे से सरकता है
शिक्षा के मंदिर में जाता है
अस्पतालों में tonic लेता है
और क्या बताऊँ तुम्हे दोस्त
भ्रष्टाचार जवानों के ताबूतों में भी होता है
भ्रष्टाचार, स्कूली बच्चों की बासी दाल में है
पेट्रोल में केरोसिन की मिलावट में है
राशन का सड़ा आनाज और
किसानों के जमींन के सौदों में है
ये आम आदमी की जेब काटता है
गरीबों की रोटी छिनता है
खाकी वर्दी रास आती है भ्रष्टाचार को
काले कोट में यह, कानून की इज्ज़त लुटता है
क्या डाक्टर, क्या इंजिनियर
क्या शिक्षक, क्या रक्षक
हर एक के दिल में बसता है
हर दफ्तर, हर कचेहरी में भ्रष्टाचार मिलता है
आवाज उठाता, जो भी खिलाफ इसके
रिश्वत देकर मुँह उसका बंद करता है
सब जगह चलता राज इसका
कलमाड़ी, राजा पर आशीर्वाद इसका
जिनके account स्विस बैंक में है
वह हर एक है मुरीद इसका
पर सुना है की...
चल पड़ा है इमानदार कोई
लेता नहीं रिश्वत कोई
कहता है ख़त्म करेगा भ्रष्टाचार को
और हिला रहा है सरकार कोई
हिम्मत ऐसी दिखा रहा कोई
भूखा बैठा है बुढा कोई
सलाम करता हू मैं भी उसको
पैदा हुआ आखिर, माई का लाल कोई
- महेश जाधव, २०-८-२०११
अन्ना तुझे सलाम!!!
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